कुमार सानू ने पूर्व पत्नी पर मानहानि का केस किया:तलाक समझौते की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया, 30 लाख रुपए हर्जाना मांगा
मशहूर प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने अपनी पूर्व पत्नी रीता भट्टाचार्य के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मामले में सानू ने 30 लाख रुपए के हर्जाने की मांग की है। साथ ही, उन इंटरव्यू को हटाने की मांग की है, जिनमें उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। यह केस दोनों के तलाक के करीब 24 साल बाद सामने आया है। कुमार सानू और रीता भट्टाचार्य का तलाक साल 2001 में हुआ था। तलाक की प्रक्रिया बांद्रा फैमिली कोर्ट में पूरी हुई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका सानू की ओर से वकील सना रईस खान के जरिए दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि रीता भट्टाचार्य ने कुछ एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स को इंटरव्यू दिए। इनमें विरल भयानी और फिल्म विंडो जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन इंटरव्यू में उन्होंने सिंगर पर गंभीर आरोप लगाए। रीता ने आरोप लगाया था कि प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें खाना नहीं दिया गया। किचन बंद कर दिया जाता था। दूध और इलाज तक से दूर रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कोर्ट की कार्यवाही चल रही थी। इसके अलावा, उन्होंने सानू पर कई अफेयर्स और परिवार की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए। ये इंटरव्यू सितंबर 2025 में सोशल मीडिया पर काफी शेयर हुए थे। तलाक समझौते की शर्तों के उल्लंघन का दावा कुमार सानू की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ये बयान तलाक के समय तय हुई सहमति की शर्तों का उल्लंघन हैं। सानू के मुताबिक, 9 फरवरी 2001 को फैमिली कोर्ट में यह तय हुआ था कि दोनों पक्ष भविष्य में एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाएंगे। याचिका में कहा गया है कि इन बयानों से सिंगर की इमेज को नुकसान पहुंचा है। इससे उन्हें मानसिक तनाव भी हुआ है। 27 सितंबर को रीता भट्टाचार्य और संबंधित मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लीगल नोटिस भेजा गया था। नोटिस में कहा गया कि अगर इंटरव्यू नहीं हटाए गए, तो आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में आरोपों की गंभीरता का भी जिक्र किया गया। इसमें कहा गया कि सानू पर प्रेग्नेंसी के दौरान खाना न देने जैसे आरोप लगाए गए। उनके परिवार को असभ्य बताया गया। गोद लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। याचिका के अनुसार, इन बयानों से सिंगर की मेहनत से बनी इमेज को नुकसान हुआ है। इससे प्राइवेट और प्रोफेशनल रिलेशन्स पर असर पड़ा है। बिजनेस से जुड़े मौकों में भी नुकसान हुआ। इस सिविल केस में जहां हर्जाना और कंटेंट हटाने की मांग है, वहीं लीगल नोटिस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के 15 अक्टूबर 2025 के एक आदेश की कॉपी भी शामिल है। यह आदेश एक अलग मामले से जुड़ा है, जिसमें एआई से बने कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
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